रांची में अब गूगल, विप्रो और टीसीएस जैसी विश्व की टॉप टेक कंपनियों के कॉर्पोरेट ऑफिस जल्द ही खोलने की तैयारी चल रही है। जिसके लिए 100 एकड़ जमीन का इस्तेमाल किया जायेगा।
बीती रात शनिवार को राजधानी रांची के एक थाने में बड़ा बवाल हो गया। काफी संख्या में लोगों ने पंडरा थाने में अचानक हमला बोल दिया। इस उपद्रव में पुलिसकर्मियों को भी गंभीर चोट आई है।
गिरिडीह के गांधी चौक पर शनिवार की देर शाम बारिश के बीच एक हृदयविदारक हादसा हो गया। अचानक तेज बहाव वाले नाले में ढाई साल का मासूम बच्चा बह गया।
साहेबगंज के बोरियो प्रखंड मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर तेलों पंचायत अंतर्गत पर्यटक स्थल के रूप में जाना जाने वाला बोंगाकोचा झरने के ऊपर पहाड़ में बसा एक आदिम जनजाति का पहाड़िया गांव ग़म्हरिया पहाड़ है।
दुमका से एक बड़ी घटना सामने आई है, जहां दहेज़ में ट्रैक्टर नहीं मिलने पर दामाद ने अपने ससुर की बेरहमी से पीट पीटकर हत्या कर दी। मामला सरैयाहाट- गोविंदपुर गांव के कदिया टोला का बताया जा रहा है।
झारखंड प्रदेश कांग्रेस की ओर से मीडिया और सोशल मीडिया से जुड़े पदाधिकारियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर प्रेस क्लब, रांची में आयोजित किया गया।
पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं आजसू प्रमुख सुदेश महतो ने कहा है कि आजसू लगातार कुड़मी समाज के साथ खड़ी रही है। कुड़मी समुदाय धैर्य के साथ विगत 90 वर्षों से अपने साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय के खिलाफ लड़ता आ रहा है।
राज्य के चौबीसों जिलों से हजारों सरकारी कर्मचारी, शिक्षक और अधिकारी रांची के जिला स्कूल मैदान में एकजुट हुए और विशाल कर्मचारी संकल्प महासम्मेलन में भाग लिया।
कुड़मी जाति को आदिवासी (ST) का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर शनिवार सुबह से झारखंड के 15 से अधिक स्थानों पर हजारों लोग रेलवे ट्रैक पर बैठ गए हैं।
झारखंड के धनबाद में स्थित शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसएनएमएमसीएच) में शनिवार सुबह से जूनियर डॉक्टरों ने बेमियादी हड़ताल शुरू कर दी है।
कुड़मी समाज को आदिवासी सूची में शामिल करने की मांग को लेकर झारखंड में आज से शुरू हुए रेल रोको आंदोलन का असर राजधानी रांची के नजदीकी मुरी रेलवे जंक्शन पर भी देखने को मिला। बड़ी संख्या में आंदोलनकारी स्टेशन पर जुटे, जिनका नेतृत्व देवेंद्रनाथ महतो कर रहे थे।
कुड़मी समाज को आदिवासी सूची में शामिल करने की मांग को लेकर झारखंड में आज से शुरू हुए रेल रोको आंदोलन का असर राजधानी रांची के नजदीकी मुरी रेलवे जंक्शन पर भी देखने को मिला। बड़ी संख्या में आंदोलनकारी स्टेशन पर जुटे, जिनका नेतृत्व देवेंद्रनाथ महतो कर रहे थे।